देहु निकुंज निवास स्वामिनी

Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती

Verse 31 of 37

वृन्दावन की रेणु तज, डोलत औरन देश। खोवत मानुष तन रतन, पावैं अन्त कलेश॥ - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (7) वृन्दावन का मुकुट, धन और देश। खोवत मानुष तन रतन, पावै अंत क्लेश.. - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (7)
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