देहु निकुंज निवास स्वामिनी
Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती
Verse 32 of 37
वृन्दावन सुख अन्त नहीं, स्थल युगल निवास।
कमलापुर हूके सदा, करत आस ब्रज वास॥
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (10)
युगल निवास वृन्दावन कोई सुख का स्थान नहीं है। हम सदैव कमलापुर में रहते हैं, हम ब्रज में रहते हैं.. - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (10)