श्री वृन्दावन यमुना कूलन
Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती
Verse 33 of 37
(राग जिला)
वृन्दावन सुख लूटैंगे हम वृन्दावन सुख लूटैंगे।
ललित लता कुंजन के नीचे रसिकन सो जा जूटैंगे॥ [1]
छके रहे छवि ललित माधुरी लीला रस गुण गूटैंगे।
ललित लड़ैती युगल इश्क में नैन डिये के खूटैंगे॥ [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (36)
(राग जिला) हम वृन्दावन का सुख लूटेंगे। हम वृन्दावन का सुख लूटेंगे। ललित कुंजन की आल्हा रसिकन सोयेगी समेगी.. [1] ललित, माधुरी लीला की छवि से प्रभावित होंगे, उनकी धुन गूंजेगी। ललित लड़ैती युगल प्रेम में एक दूसरे से लड़ेंगे.. [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य, विनय (36)