ललित लड़ैती कुँवरि बिनु और न कछुक सुहाई

Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती

Verse 36 of 37

ललित लड़ैती कुँवरि बिनु, और न कछुक सुहाई। नेक नैन की कोर कै, लेनौ चित्त चुराई॥ - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी करुणा कटाक्ष ललित लड़ैति कुँवरि बिनु, और न कचुक सुहाई। नेक आँखों की कोर चुरा ली, पर दिल चुरा लिया.. - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी करुणा व्यंग्य
हे स्वामिनि हर्षामिनि भामिनि अब मेरी सुधि लीजैललित लड़ैती कुँवरि बिनु और न कछुक सुहाई