देहु निकुंज निवास स्वामिनी

Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती

Verse 6 of 37

धनि धनि धनि बृन्दाविपिन, सब सुखमा की खान। गौर श्याम बिहरत जहां, रसिकन जीवन प्रान॥ - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (5) धनि धनि धनि बृंदाविपिन, सुखमा के सब खान। गौर श्याम बिहारत जहां, रसिकन जीवन प्राण.. - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (5)
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