देहु निकुंज निवास स्वामिनी
Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती
Verse 8 of 37
(राग भैरवी व यमन)
हा हा देर करो न किशोरी।
श्री वृन्दावन वास दीजिए टहल महल नव कुंजन खोरी॥ [1]
बंशीवट तट करत केलि नित अवलोकहुँ सुन्दर वर जोरी।
ललित लड़ैती आस पुरावो चूक माफ करि लखि निज ओरी॥ [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (7)
(राग भैरवी वी यम्ना) हा हा विलंब एन किशोरी। अमावस्या के दिन श्री वृन्दावन महल में विराजमान होते हैं। ललित लड़ैती अस पूर्वो चुक माफ करि लखि निज ओरि.. [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य, विनय (7)