पोढ़े श्री राधा के गेह

Krishnadas Vani — श्री कृष्णदास अधिकारी

Verse 19 of 28

(राग मल्हार व कान्हरौ) पोढ़े श्री राधा के गेह। नवल धाम नवल शैय्या नवल बाँध्यो नेह॥ [1] नवल सुन्दर नवल जीवन नवल बरखत मेह। कृष्णदास प्रभु त्रैलोक नागर नवल श्याम सनेह॥ [2] - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (803) (राग मल्हार वे कन्हारौ) श्री राधा ने गेहूँ बोया। नवल धाम नवल बिस्तर नवल बंध्यो नेह.. [1] नवल सुंदर नवल जीवन नवल बरखत मेह। कृष्णदास प्रभु त्रैलोक नगर नवल श्याम सनेह.. [2] - श्री कृष्णदास की वाणी, श्री कृष्णदास अधिकारी जी (803)
नाँचत मोहन संग राधिकाराधा प्यारी! तू रसरंग भरी