राधा प्यारी! तू रसरंग भरी
Krishnadas Vani — श्री कृष्णदास अधिकारी
Verse 20 of 28
(राग ललित)
राधा प्यारी! तू रसरंग भरी।
मैं जानी इहिं फौज मदन की, लूटलई सगरी॥ [1]
अटपटे भूषन, रंगमंगी अगिया अलकाबलि बिथुरी।
'कृष्णदास' प्रभु गिरिधर पिय संग, रतिरस केलि करी॥ [2]
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (782)
(राग ललिता) राधा प्रिये! आप रसदार और भारी हैं. मैं मदन की यह सेना जानता हूं, लुतलाई सागरी.. [1] अटापते भूषण, रंगमंगी अगिया अलकाबली बिठुरी। 'कृष्णदास' प्रभु गिरिधर पिया संग, रतिरस केलि करि.. [2] - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (782)