तेरे रूप सम औरु नहीं

Krishnadas Vani — श्री कृष्णदास अधिकारी

Verse 25 of 28

(राग टोडी) तेरे रूप सम औरु नहीं खेंचों हठि रेखी। अंग-अंग लावन्य-सदन सखि भ्रूविलास त्रिभुवन श्रीसेखी॥ [1] ता छिन तें कछु और बिमल छबि जा छिन तैं गिरिधर पिय देखी। 'कृष्णदास’ प्रभु रसिक-मुकुटमनि सुरति मूरति हृदयांतर लेखी॥ [2] - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (46) (melody broken) There is no woman like you, draw a picture of an elephant. अंग-अंग लावण्य-सदन सखी भ्रुविलास त्रिभुवन श्रीसेखी।।[1] ता छिन ते कछु और बिमल छवि जा छिन ते गिरिधर पिया देखी। 'कृष्णदास' प्रभु रसिका-मुकुटमणि सुरति मूर्ति हृदयांतर लेखी.. [2] - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (46)
तेरे नैंननि की बलि जाउँँतेरी मैं अधिक चतुराई जानी