तेरी मैं अधिक चतुराई जानी

Krishnadas Vani — श्री कृष्णदास अधिकारी

Verse 26 of 28

(राग कानरौ) तेरी मैं अधिक चतुराई जानी। गिरिधर पिय तन भौंह कमानें, नैंन अनंग सर तानी॥ [1] या त्रिभुवन में तुही है लडैती, सकल जुवति-सिर-रानी। 'कृष्णदास’ प्रभु गिरिधर पिय के, तन मन प्रान समानी॥ [2] - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (197) (राग कनारौ) मैं तुम्हारी चतुराई के बारे में अधिक जानता हूं। गिरिधर पिया तन भानुह कामानें, नैनन अनंग सर तानि। [1] या आप ही त्रिभुवन में लड़ो, सकल जुवति-सीरा-रानी। 'कृष्णदास' प्रभु गिरिधर पिया के, तन मन मन प्राण समानी.. [2] - श्रीकृष्णदास, श्रीकृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (197)
तेरे रूप सम औरु नहींवृषभानु कुँवरि खेलति बसंत