नंद-नंदन की बलि-बलि जैये

Kumbhandas Vani — श्री कुम्भनदास

Verse 11 of 23

(राग केदारौ) नंद-नंदन की बलि-बलि जैये। श्याम मृदुल कलेवर की छवि, देख - देख सुख पैये॥ [1] सकल लोक-पति, श्रीपति ठाकुर, रसना रसिक-बिमल जसु गैये। 'कुम्भनदास' प्रभु गिरिवर-धर को, तनु-मनु सरबसु दैये॥ [2] - श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (234) (राग केदारौ) नन्द-नन्दन के बालि-बलि जाय। श्याम मृदुल कलवार की छवि देख कर सुख पाओ। [1] सकल लोक-पति श्रीपति ठाकुर, रसना रसिका-बिमल जसु गये। 'कुम्भनदास' प्रभु तनु-मनु सरबसु दे गिरिवर-धर। [2] - श्री कुम्भनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (234)
मेरो मन तौ हरि के संग गयोन्यांइरी तू अलकलडी