पोढे हरि राधिका के भवन
Kumbhandas Vani — श्री कुम्भनदास
Verse 14 of 23
(राग केदार)
पोढे हरि राधिका के भवन। [1]
बिजना व्यार करत ललितादिक शीतल आवत पवन॥ [2]
सुन कें कान शीतल भई छतियाँ विरह दु:ख के दवन। [3]
दास कुम्भन धर्यो ललिता नाम राधा रवन (रमण)॥ [4]
- श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी
(राग केदारा) पोधे हरि राधिका के भवन। [1]. [3] दास कुम्भन धरयो ललिता नाम राधा रावण (रमन)... [4] - श्री कुम्भनदास, श्री कुम्भनदास जी के वचन