पोढ़े हरि राधिका के संग
Kumbhandas Vani — श्री कुम्भनदास
Verse 15 of 23
(राग विहाग)
पोढ़े हरि राधिका के संग। [1]
रंग महल में ललित तिबारी परदा परै सुरंग॥ [2]
झल मलात पावक अंगीठी रत्न जटित वहोत रंग। [3]
कुम्भनदास प्रभु गोवर्धन धर मोहत कोटि अनंग॥ [4]
- श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (302)
(राग विहागा) पोधाये हरि, सहित राधिका। [1] आरएनजी महल में ललित तिबारी परदा पराई सुरंग.. [2] झल मालत पावक अंगिथि रत्न जतित वाहोत रंग। [3] कुम्भनदास प्रभु गोवर्धन धर मोहत कोटि अंग.. [4] - श्री कुम्भनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (302)