सखी मोय बूँद अचानक लागी
Kumbhandas Vani — श्री कुम्भनदास
Verse 20 of 23
(राग मलहार)
सखी मोय बूँद अचानक लागी।
सोवत हुती मदन मदमाती घन गरज्यो तब जागी॥ [1]
दादुर मोर पपैया बोलत कोयल शब्द सुहागी।।
कुम्भनदास लाल गिरधर सो जाय मिली बड़ भागी॥ [2]
- श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (105)
(राग मल्हारा) सखी मोय बांध अचानक शुरू हो गया। सोवत हुति मदन मदमाती घन गरज्यो तब जागे.. [1] दादुर मोर पपीता बोलत कोयल शब्द सुहागी.. कुंभनदास लाल गिरधर सो जय मिलि बड़ भागी.. [2] - श्री कुंभनदास जी की वाणी (105)