भगतकौ कहा सीकरी काम

Kumbhandas Vani — श्री कुम्भनदास

Verse 4 of 23

(राग सारंग) भगतकौ कहा सीकरी काम। [1] आवत जात पन्हैया टूटी बिसरि गयो हरिनाम॥ [2] जाको मुख देखे दुख लागै ताकों करन परी परनाम। [3] कुंभनदास लाल गिरधर बिन यह सब झूठौ धाम॥ [4] - श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (397) (राग सारंगा) भगतकौ कहा सीकरी काम। [1] हर बार पहिया टूटा है, मेरा नाम भूल गया है.. [2] जाकर देख मेरा मुख, करण के नाम की खातिर मैं उदास हो जाऊंगा. [3] कुम्भनदास लाल गिरधर, ये सब झूठे धाम.. [4] - श्री कुम्भनदास, श्री कुम्भनदास जी के वचन (397)
बनी राधिका गिरधर की जोरीदम्पति दोउ राजत कुंज-भवन