दम्पति दोउ राजत कुंज-भवन
Kumbhandas Vani — श्री कुम्भनदास
Verse 5 of 23
(राग हमीर)
दम्पति दोउ राजत कुंज-भवन।
पीत कुल्है सिर, कटि पियरौ पट, कुंडल ललित श्रवन॥ [1]
विजना-बियार ढोरति सखी नियरें, सीतल लागत पवन।
'कुंभनदास' गोवर्द्धन-धर, रिझावत प्यारी राधा रवँन॥ [2]
- श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (385)
(राग हमीरा) युगल दोऊ रजत कुंज-भवन। पिता कुल्है सर, कटि पियारौ पाट, कुंडल ललित श्रवण। [1] विजना-बियार धोरति सखी नियारेन, शीतल लगत पवन। 'कुम्भनदास' गोवर्धन-धार, राजावत प्यारी राधा रावण। [2] - श्री कुम्भनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (385)