गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 17 of 32

कुंज महल में बैठक राखैं, कुंज महल में केलि। गौर श्याम लपटे रहैं, मानौं कनक की बेलि॥ - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (10) कुंज महल में राखैन मिलन, कुंज महल में केली। गौर श्याम फिरते हैं, कनक पेट टटोलते हैं... - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (10)
गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रजगुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज