गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव
Verse 18 of 32
ललित सरोवर ललित वन, ललित लाडिली रूप।
ललित बिराजै बिपुन में, ललित बिहारी भूप॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (23)
सुन्दर झील, सुन्दर वन, सुन्दर नारी रूप। ललित बिरजाई बिपुन मन, ललित बिहारी भूप.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (23)