गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 19 of 32

ना काहू सौं रूसनौ, ना काहू सौं रंग। श्री ललितमोहिनी दास की, अद्भुत केलि अभंग॥ - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (27) न मैं सौ रंग कह सकता हूं, न मैं सौ रंग कह सकता हूं। श्री ललितमोहिनी दास की, अद्भुत केली अभंग.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (27)
गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रजगुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज