गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 20 of 32

निंदा करै सो धोबी कहिए, अस्तुति करै सो भाट। अस्तुति निंदा दोउन ते न्यारौ, सोई साधु निराट॥ - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (28) निंदा करो तो धोबी कहो, प्रशंसा करो तो कमीना कहो। अस्तुति निंदा दूं ते न्यारौ, सोई साधु निरत.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (28) जो निंदा करता है, सांसारिक भाषा का प्रयोग करता है, वह धोबी कहलाता है; और जो किसी की तारीफ करता है उसे बार्ड कहते हैं. लेकिन जो निंदा और प्रशंसा से परे है और समदर्शी है उसे एकान्तवासी साधु कहा जाता है।
गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रजगुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज