गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 3 of 32

औगुन तौ लीजै नहीं, गुन कौ लीजै उठाइ। श्री कुंजबिहारिनि लाडिली, पोषत मन के भाइ॥ - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (20) औगुन तौ लीजै नहीं, गुना का लीजै उठै। श्री कुंजबिहारिणी लाडिली, पोषित मन की भाई.. - श्री ललितमोहिनी देव, स्वर श्री ललितमोहिनी देव जू (20)
गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रजगुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज