गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 25 of 32

तन झूठो मन झूठ है, झूठो यह संसार। रंग महल में बिहारी बिहारिनि, निश्चय यह उरधार॥ - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (36) शरीर मिथ्या है, मन मिथ्या है, यह संसार मिथ्या है। रंग महल में बिहारी बिहारी, निश्चय ही यह ऋण.. - श्री ललितमोहिनी देव, स्वर श्री ललितमोहिनी देव जू (36)
गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रजआजु बधाई श्रीवृन्दावन