आजु बधाई श्रीवृन्दावन

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 26 of 32

(राग बसंत) आजु बधाई श्रीवृन्दावन। कुंजमहल श्रीबिहारी बिहारिनि केलि करत छिनही छिन॥ [1] श्रीहरिदासी जू लाड़ लड़ावति इनही कौ ये हैं धन। श्रीललितमोहिनी की निजु जीवन ये वे वे एकै मन॥ [2] - श्री ललित मोहिनी देव जू, श्री ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (63) (राग बसंत) अजु बधाई श्री वृन्दावन। कुंजमहल, श्री बिहार बिहारिणी छीनने वाली है.. [1] श्री हरिदासी युद्ध करके धन छीनने वाली है। श्री ललित मोहिनी का व्यक्तिगत जीवन, यह, वह, एक मन.. [2] - श्री ललित मोहिनी देव जू, श्री ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के छंद (63)
गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रजजाहि वृन्दावन नहि भावे। सो यहाँ काहे कौं मूंड मुडावै॥