आजु बधाई श्रीवृन्दावन
Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव
Verse 28 of 32
(राग बसंत)
खेलत आजु प्रिया नव रंगी।
चमकत रमकत लगी स्याम उर ललित मोहिनी संगी॥ [1]
जोवन झलक ललक सुंदर की बाढ्यौ रंग अनंगी।
यह सुख पीवत जीवत हम सब देखत केलि तरंगी॥ [2]
- श्री ललित मोहिनी देव जू, श्री ललित मोहिनी देव जू की वाणी (45)
आज प्रिया नवरंगी (राग बसंत) बजा रही हैं. सियाम की चमकती शोभा और सुंदर सायरन साथी.. [1] वासना की युवा झलक और सुंदर अभिवादन। इस खुशी और आनंद में हम सभी को लहरें ही लहरें नजर आती हैं.. [2] - श्री ललित मोहिनी देव जू, श्री ललित मोहिनी देव जू की वाणी (45)