गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव
Verse 4 of 32
भजन करौ भोजन करौ, गावो तान तरंग।
निसि दिन लव लागी रहै, रसिक बिहारी संग॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (19)
भजन करो, भोजन करो, शरीर तरंग गाओ। मुझे रसिक बिहारी से हर दिन प्यार हो गया है.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की आवाज (19)