गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 6 of 32

बिहारीजी से बिहारीजी, स्वामी जी से स्वामी जी। औरनि ते आँखिं मूँदि, इन्हिं निहारी जी॥ - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (37) बिहारीजी से बिहारीजी, स्वामीजी से स्वामीजी। औरणी ते आंखिन मुंदी, इन्ही निहारी जी.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (37)
बिहारी तेरे नैंना रूप भरेगुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज