गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव
Verse 7 of 32
चलौ साधौ निधिवन जाइयै। श्रीस्वामीजू कौ दरसन पाइयै॥
श्रीकुंजबिहारिनि लाड लडाइयै। श्रीवृन्दावनबसि अनत न जाइयै॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (25)
आइये साधु निधिवन चलें। श्री स्वामीजी, मुझे किसका दर्शन करना चाहिए? श्री कुंजबिहारिणी लड़ो। श्री वृन्दावन बसि अनात जाइयै.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (25)