गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव
Verse 8 of 32
चतुर चिंता ना करै, उमँगि उमँगि गुन गाइ।
जान हार रहि है नहीं, आवान हार न जाइ॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (40)
चिंता मत करो, चतुर ने उत्साह से गाया। प्रजा हारी नहीं है, तंदूर हारा नहीं है.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (40)