बड़े भाग पाई जु हम, जीवन प्रान-अधारि।
Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य
Verse 18 of 65
बड़े भाग पाई जु हम, जीवन प्रान-अधारि।
जोरी रसिक-सिरोमनी, सहज सदा सुखकारि॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सहज सुख (30)
हम, बड़े पैमाने पर, अस्तित्ववादी हैं। जोरि रसिका-शिरोमणि, लाती सहज सुख सदा.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (30)