सुखकारी सबके सदा

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 2 of 65

(भैरव राग) (दोहा) जय वृन्दावन नित्य जै, नित्य कुञ्ज सुखसार। जय श्रीराधा पिय जहाँ, बिहरत नित्य बिहार॥ (पद) जय वृन्दावन नित्य बिहार। श्रीराधा पिय परम उदार। जय सहचरी आदि रंगदेव्य। स्यामास्यामहि जिनकें सेव्य॥ [1] जय नव नित्य कुंज सुख सार। जय जमुना कंकन आकार। श्रीहरिप्रिया सकल सुखसार। सर्व वेद को सारोद्धार॥ [2] - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सिद्धांत सुख (1) (दोहा) श्री वृंदावन धाम की जय हो, जहाँ अनंत कुंजें हैं और जो समस्त सुखों का सार है; जहाँ श्री राधा कृष्ण नित्य विहार करते हैं, उन जुगल किशोर की जय हो। (पद) श्री नित्य वृन्दावन, सुख सार स्वरूप नित्य निकुञ्ज, नित्य विहार, कंकना कार श्रीयमुना जी तथा उन श्रीरङ्गदेवी आदि सहचरियों कि जय हो जिनके सेव्य वह परम उदार श्री प्रिया प्रीतम हैं जो सब सुखों तथा वेदों के सार स्वरूप हैं। [1] नवल नित्य कुंजों की जय हो जहाँ सुख के सार श्री श्यामा श्याम विहार करते हैं, और श्री यमुना जी की जय हो, जिन्होने वृंदावन धाम को कंकणाकार रूप से घेरे रखा है। श्री राधा कृष्ण की जय हो, जो अनंत सुख एवं समस्त वेदों के सार हैं। [2]
हम बालक तुम माय हमारी(दोहा)