सुखकारी सबके सदा

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 20 of 65

सदा सनातन एक रस, सदा बसत सब काल। श्रीराधा रानी जहाँ, राजा मोहन लाल॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी , सहज सुख (31) एक स्वाद सदा अविनाशी, सब कुछ सदा कल। श्रीराधा रानी जहाँ, राजा मोहन लाल.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (31)
(दोहा)सुखकारी सबके सदा