सुखकारी सबके सदा
Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य
Verse 22 of 65
पल बिछुरें न कल परें, ढरे रहैं रसढारि।
सहज साँवरी गोरि यह, जोरी परम उदारि॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, उत्साह सुख (37)
एक पल में मेरे पैर अलग हो जायेंगे, कल मेरे पैर बरकरार रहेंगे. वह स्वाभाविक रूप से गोरी त्वचा वाली महिला हैं, बहुत उदार हैं.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, उत्साह और खुशी (37)