सुखकारी सबके सदा
Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य
Verse 50 of 65
(दोहा)
नेम प्रेम ते परे जो, अति दुर्ल्लभ अधिकार।
रीझि देत जिहिं जुगल जु, सुमिरत सुरत बिहार॥
(पद)
जुगलवर को यह सुरत बिहार।
जो कोउ गावै सुनै सुनावै, पाबै निज अधिकार॥ [1]
नेम प्रेम तें परें परम पद, जाको अति विस्तार।
श्रीहरिप्रिया रीझि अपनावें, देत न लावें बार॥ [2]
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (100)
(दोहा) नाम अति दुर्लभ अधिकार है, प्रेम से परे। रीझी देत जिहिन जुगल जू, सुमिरत सूरत बिहार.. (पोस्ट) जुगलवार को ये सूरत बिहार. जो गायक गाता है और सुनता है उसे उसका अधिकार मिलता है। श्री हरिप्रिया रिझी अपानावेन, दिनांक एन लवीन बार.. [2] - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (100)