प्रान वारि बलिहारी लै, सुधि बुधि सकल विसारि।

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 51 of 65

प्रान वारि बलिहारी लै, सुधि बुधि सकल विसारि। बदन सुधानिधि निरखि कें, फूली तन सहचारी॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सहज सुख (111) मैं अपने प्राणों का त्याग करता हूँ और अपने मन तथा बुद्धि का विस्तार करता हूँ। शरीर सुधानिधि निरखि केन, पूर्ण शरीर साथी.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (111)
सुखकारी सबके सदासुखकारी सबके सदा