एक स्वरूप सदा द्वै नाम॥
Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य
Verse 56 of 65
एक स्वरूप सदा द्वै नाम॥
आनन्द की अहलादिन श्यामा।
अहलादिन के आनन्द श्याम।
सदा सर्वदा युगल एक तन एक युगल तन विलसत धाम॥
श्री हरिप्रिया निरन्तर नितप्रति काम रूप अद्भुत अभिराम॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सिद्धान्त सुख (26)
रूप एक है, नाम सदैव दो हैं... आनंद का शाश्वत सौंदर्य। अलहदीन के आनंद श्याम। सदैव युगल, एक शरीर, एक युगल, एक शरीर, विलासिता का निवास.. श्री हरिप्रिया, निरंतर नित्य कर्म, अद्भुत आनंद स्वरूप.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सिद्धांत सुख (26)