सुखकारी सबके सदा

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 61 of 65

कृपा कटाक्षि चितै 'श्रीहरिप्रिया'। तबही सकै चरन-रज लाध॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी कृपया व्यंग्य में 'श्री हरिप्रिया' लिखें। तबहि सकाइ चरण-रज लध.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी
कहि न परै सोभा या सुख की।मन मोहन मन मोहनी, सहज ही स्यामल गौर।