जो कछु सो तुव चरन बल, नहिं मेरो उपकार।

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 8 of 65

जो कछु सो तुव चरन बल, नहिं मेरो उपकार। मोहिं बड़ाई देति हौ, अहु स्वामिनी सुखसार॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सहज सुख (17) मैं जो कुछ कहता हूँ वह आपकी शक्ति है, मेरा उपकार नहीं। मोहिं तुम सुख का गुणगान कर रहे हो.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (17)
(दोहा)सुखकारी सबके सदा