श्री वृषभानु कुल की, भूषन जगत अभूत।

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Verse 13 of 23

श्री वृषभानु कुल की, भूषन जगत अभूत। बारौं कोटिक नृपन के, या कन्या पर पूत॥ - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (14.8) श्री वृषभानु कुल के हैं, जग में अनेक अलंकार हैं। बरौं कोटिक नृपन के, या कन्या पार पूत.. - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (14.8)
रंगीली गलिन बिच हो हो होरी।ललित मोहिनी कुंज में राजत अद्भुत रूप