ललित मोहिनी कुंज में राजत अद्भुत रूप
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Verse 16 of 23
देत दीन कूँ दान नित, सदा वृन्दावन वास।
समता और सीतल मई, भजि लै श्री हरिदास॥
- श्री ठाकुर दास, श्री ठाकुर दास जी की वाणी, साखी (2)
प्रति दिन, प्रति दिन, सदा वृन्दावन में निवास करो। समता शीतल माता, भजी लै श्री हरिदास.. - श्री ठाकुर दास, श्री ठाकुर दास जी की वाणी, सखा (2)