यह वृन्दावन यह समैं

Nagaridas Extras —

Verse 6 of 23

श्री राधे कीजै कृपा, चहत नागरीदास। अपने वृन्दाविपुन कौं, देहु वास सुखरास॥ - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, निकुंज विलास (104) श्रीराधे कृपा करो चाहत नागरीदास। अपने वृंदाविपुन कौन, देहु वास सुखारस.. - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी के वचन, निकुंज विलास (104)
यह वृन्दावन यह समैंयह वृन्दावन यह समैं