यह वृन्दावन यह समैं

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Verse 7 of 23

यह वृन्दावन यह समैं, यह दम्पति की प्रीति। नागरिया कैं हिय बसो, निति विहार रस- रीति॥ - श्री नागरी दास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, निकुंज विलास (102) यही वृन्दावन है, यही एकता है, यही युगल का प्रेम है। नागरिया कहाँ निवास करते हैं, नीति विहार, रस-रीति.. - श्री नागरी दास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरी दास जी के वचन, निकुंज विलास (102)
यह वृन्दावन यह समैंअष्ट सिद्धि नव निद्धि जिहीं, टहल करत नित धाम।