अष्ट सिद्धि नव निद्धि जिहीं, टहल करत नित धाम।

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Verse 8 of 23

अष्ट सिद्धि नव निद्धि जिहीं, टहल करत नित धाम। कमला दासी लौं फिरति, महल-टहल दिन जाम॥ - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (14.2) अष्ट सिद्धि नव निधि जिहिन, प्रति दिन घूमत पावन तीर्थ। कमला दासी लौं फलति, महला-टहल दिन जाम.. - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (14.2)
यह वृन्दावन यह समैंनागिरि नागर भाव तैं, मंगल रूप रसाल।