हीरा कौं ललिचात लिवासी

Nagaridev Vani — श्री नागरीदेव

Verse 10 of 15

श्रीनागरीदास अनन्य धन, धर्म सुदृढ उर धारि। दंपति सम्पति संचि हियै, सुख सोवो पाँव पसारि॥ - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जु की वाणी( 15) श्रृंगारी दास के पास धन और धर्म अधिक है. दंपत्ति का धन चला गया, सर्वत्र खुशहाली छा गई... - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जू की वाणी (15)
श्री नागरीदासि अनन्यनि कौ गढ़, बन बाँकौ कहा कोऊ पावै।हीरा कौं ललिचात लिवासी