श्री नागरीदासि अनन्यनि कौ गढ़, बन बाँकौ कहा कोऊ पावै।
Nagaridev Vani — श्री नागरीदेव
Verse 9 of 15
श्री नागरीदासि अनन्यनि कौ गढ़, बन बाँकौ कहा कोऊ पावै।
नित्यविहार नित्य सिद्धन को, तू काहे को मूंड मुंडावै॥
- श्री नागरिदेव जू, श्री नागरिदेव जू की वाणी (8)
श्री नागरीदासी अनन्यै, गधा कहाँ जाय? नित्यविहार नित्य सिद्ध, सिर क्यों मुँडाते हो... - श्री नागरीदेव जू, श्री नागरीदेव जू की वाणी (8)