हीरा कौं ललिचात लिवासी
Nagaridev Vani — श्री नागरीदेव
Verse 11 of 15
यहै उपदेस उपाइ श्रीबिहारिनिदासि कृपा तैं जानैं।
नित्य सिद्ध बिनु नागरीदास, कहा कोउ पहिचानैं॥
- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जु की वाणी (5)
यह श्रीबिहारिणी की कृपा से दिया गया उपदेश है। नित्य सिद्ध बिनु नागरीदास, जहाँ कोई नहीं पहुँच सकता.. - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जू की वाणी (5)