श्रीगुरु सन्धि सुभाव न पावत

Nagaridev Vani — श्री नागरीदेव

Verse 12 of 15

कुंज पुलिन कौतिक घनौं, मिलि खेलत रस रासि। श्रीबिहारीबिहारिनिदासि संग, सुख निरखि नागरीदासि॥ - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (18) कुंज पुलिन कौतिक घनौ, मिलि खेलत रस रसि। श्री नागरीदासी सहित सुख भय बिन नागरीदासी.. - श्री नागरीदेव जी श्री नागरीदेव जी की वाणी साखी (18)
हीरा कौं ललिचात लिवासीश्रीगुरु सन्धि सुभाव न पावत