श्रीगुरु सन्धि सुभाव न पावत

Nagaridev Vani — श्री नागरीदेव

Verse 13 of 15

श्रीगुरु सन्धि सुभाव न पावत, गावत जग जस धूता। बिना अनन्य विहारै चाहत, क्यों पावहुगे पूता॥ - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (11) श्री गुरु संधि सुभाव न पावत, गावत जग जस धुता। दूसरे विहाराई की इच्छा के बिना, पुत्र क्यों मिलेगा.. - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी के शब्द, मित्र (11)
श्रीगुरु सन्धि सुभाव न पावतअलमस्त रहैं अलबेले लाल, लाडिली के रसमाते