अलमस्त रहैं अलबेले लाल, लाडिली के रसमाते

Nagaridev Vani — श्री नागरीदेव

Verse 14 of 15

अलमस्त रहैं अलबेले लाल, लाडिली के रसमाते। छकी छबि सों पलकें बर बरुनी नैननि में मुस्काते॥ - श्री नागरी देव जी, श्री नागरी देव जू की वाणी, श्रिंगार रस के पद (34) खुश रहो, लापरवाह लाल, बचकानी आकर्षण के साथ। छकि छवि सों उठै बरुनि नानानि मन मुस्काए.. - श्री नागरी देव जी, श्री नागरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के छंद (34)
श्रीगुरु सन्धि सुभाव न पावतबिहारिनि लाडिली सुख रासि