चरनकमल रज सेइहौं, मन-बच-क्रम यह आस।

Nagaridev Vani — श्री नागरीदेव

Verse 3 of 15

चरनकमल रज सेइहौं, मन-बच-क्रम यह आस। अपनों सर्बस जानि कैं, बलि जाइ नागरीदास॥ - श्री नागरिदेव जू, श्री नागरिदेव जू की वाणी (1) मैं चरण कमल से, मन-बचा-क्रम यः। मैं क्या जानूं प्रिय बाली जय नागरीदास.. - श्री नागरीदेव जू, श्री नागरीदेव जू की वाणी (1)
हीरा कौं ललिचात लिवासीहीरा कौं ललिचात लिवासी