हीरा कौं ललिचात लिवासी

Nagaridev Vani — श्री नागरीदेव

Verse 5 of 15

(सवैया) कौन करै तप तर्पन तीरथ, तीन प्रकार कहाँ मन लाऊँ। [1] कौन करै व्रत संजम नेम, सुप्रेम पुनीत प्रसादहि पाऊँ॥ [2] कुंजनि वास निवास रसिक, श्रीनागरीदास विलास बढाऊँ। [3] चित्त लगाय उभे पद अंबुज, नित्यबिहारीबिहारिन गाऊँ॥ [4] - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जु की वाणी, सिद्धांत के पद (31) (सवैया) तप, तर्पण, तीर्थ कौन करेगा, तीन प्रकार कहां से पाऊं? [1] सर्वोच्च पवित्र प्रसाद संजम के नाम पर कौन उपवास करेगा? [2] कुंजनि वास निवास रसिक, श्रीनगरीदास विलास बढ़ौं। [3].
हीरा कौं ललिचात लिवासीलै करुवो कौपीन कामरी, कुंजनि कुंजनि कूल विलास।